Suicide: An Unexpected Pain
हमारे आस-पड़ोस अनेक प्रकार की घटनाए घटित होती है जिनमें से कुछ तो अच्छी होती हैं और कुछ ऐसी होती है जो हमें अन्दर से झकझोर कर रख देती है। इन घटनाओं का प्रभाव हमारे ऊपर इतना जबरदस्त होता है कि उनसे निकलना या उबरना कठिन हो जाता है। हम बात कर रहे हैं ऐसे अनैतिक कृत्य कि जिसे व्यक्ति बिना-सोचे समझे अन्तिम समाधान समझता है और वह स्वंय तो चला जाता है परन्तु अपने पीछे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से उसका यह
निर्णय कई जिन्दगियों को नकारात्मक रूप प्रभावित करता है। यह निर्णय है आत्महत्या का,
आत्महत्या का अर्थ है स्वयं के द्वारा जानबूझकर अपने जीवन को समाप्त करने की एक अत्यन्त हृदय विदारक घटना, जो तीव्र मानसिक तनाव, अवसाद, निराश, वित्तीय तंगी या पारिवारिक समस्याओ के कारण होती है।
एनसीआरबी (2022) की रिपोर्ट के अनुसार 1.71 लाख से अधिक लोगों ने जान दे दी जो अब तक की सबसे उच्च दर 12.4 प्रति लाख है।
आत्महत्या करने वालो की औसत आयु 15-39 वर्ष थी, जिनमें 72.51%पुरुषो ने विभिन्न कारणों से आत्महत्या कर ली। आत्महत्या के मुख्य लक्षणों या संकेतो में व्यक्ति का बार-बार मरने की बातें करना, हताशा, सामाजिक, अलगाव, नींद में बदलाव, आत्महत्या के तरीके ढूढना इत्यादि है, परन्तु स्पष्ट तौर पर इन लक्षणों के बावजूद भी कई बार लक्षण दिखाई नही देते है जैसे व्यक्ति अच्छे से बातचीत किया, खाया-पीया, मूवी देखने गया या घूमकर वापस आया है और अगले दिन उसके आत्महत्या करने की बात पता-चलती है।
आत्महत्या एक गंभीर सामाजिक मुद्दा जिसमे व्यक्ति अपने पीछे कई सवाल छोड़ जाता है। आत्महत्या के संकेतो को पहचानकर, संवाद करके और समय पर सही मनोचिकित्सक से परामर्श लेकर रोका जा सकता है।
मेरा यह विचार है कि जिस भी व्यक्ति के मन में आत्महत्या का खयाल आता है या आ रहा है, चाहे वह आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक या किसी भी समस्या से जूझ रहा है, तो स्वयं को कुछ समय दे और अपने आप से पूछे - क्या ये समस्याए हमेशा रहेगी?, क्या ये परिस्थितियाँ हमेशा रहेगी?, बिल्कुल नहीं। जैसे अँधेरे के बाद उजाला होता है वैसे ही ये मानवनिर्मित या परिस्थितिजन्य समस्याएँ कुछ समय बाद समाप्त हो जायेगी।
यदि उससे भी संतुष्टि नहीं है तो दो मिनट रुककर सोचिए इस अमृतरूपी अमूल्य जीवन को समाप्त कर देने से सारी समस्याए समाप्त हो जायेगी, नहीं। एक संकल्प लीजिए, जो भी विकट परिस्थितियाँ आपके समक्ष है, उनका आप डटकर सामना करेंगे। देखो कि इससे बुरा क्या हो सकता है, और जितना नकारात्मक हम सोचते है उतना होता नही है। जीवन आपका एक खिला हुआ पुष्प है इसकी महक अपने आस-पास में फैलाये पूरी बगिया को ही उजाड़कर न फेक दें।