Mahadev Mahavidyalaya
डिजिटल लत (Digital Addiction)

डिजिटल लत (Digital Addiction)

📅 02 Jan 2026   |   🏫 ZOOLOGY   |   👁️ 327 Unique Views

ABHISHEK KR JHA
ABHISHEK KR JHA
ZOOLOGY Department

 डिजिटल लत (Digital Addiction) -

आज का इंसान मोबाइल के साथ जी रहा है, मोबाइल के साथ जागता है और मोबाइल के साथ ही सो जाता है। मोबाइल हमारी ज़रूरत है, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन जब यही ज़रूरत आदत बन जाए और आदत लत में बदल जाए, तब वही मोबाइल हमारे मानसिक, शारीरिक और सामाजिक जीवन के लिए खतरा बन जाता है।

मोबाइल फ़ोन ने हमारी ज़िंदगी को आसान बनाया है—काम, पढ़ाई, मनोरंजन, सब कुछ हमारी उंगलियों पर है। लेकिन इसी डिजिटल सुविधा ने चुपचाप हमारे मन, शरीर और संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। आज हर उम्र का व्यक्ति स्क्रीन में इतना उलझ चुका है कि उसे वास्तविक जीवन उबाऊ और धीमा लगने लगा है। यही कारण है कि विशेषज्ञ आज मोबाइल को “नया नशा” या‌ “नोमोफोबिया” या "डिजिटल लत" कह रहे हैं।

इस लेख में आप जानेंगे—

★मोबाइल से पहले ख़ुद से मिलिए - 

आपका पूरा दिन कैसा रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने दिन की शुरुआत कैसे करते हैं।

क्या आपकी सुबह एक तेज़ अलार्म और नोटिफिकेशन की बाढ़ के साथ शुरू होती है ?

या फिर शांति, आत्म-जागरूकता और कृतज्ञता के साथ ?

आज अधिकांश लोग सुबह आँख खुलते ही मोबाइल उठाते हैं—

और कुछ ही मिनटों में हम पूरी दुनिया की समस्याओं का बोझ अपने दिमाग पर डाल लेते हैं।

परिणाम:

दिन की शुरुआत ही तनाव, बेचैनी और प्रतिक्रिया (Reactive Mode) से होती है, न कि सृजन (Creative Mode) से।

हम दुनिया से मिलने से पहले ख़ुद से मिलने का मौका ही नहीं देते।

मोबाइल कैसे भटका रहा है हमारा ध्यान ?

 1. नोटिफिकेशन और डोपामिन का जाल - 

हर नोटिफिकेशन दिमाग में डोपामिन छोड़ता है। यही रसायन हमें बार-बार फोन उठाने के लिए मजबूर करता है।

धीरे-धीरे दिमाग शांत रहने की क्षमता खो देता है।

2. निर्णय क्षमता और गहरी सोच पर असर -

लगातार स्क्रीन देखने से:

एकाग्रता कम होती है,

धैर्य घटता है,

गहरी सोच और रचनात्मकता खत्म होने लगती है,

 3. मल्टीटास्किंग की गलतफहमी-

मोबाइल हमें लगता है कि हम एक साथ कई काम कर रहे हैं, जबकि असल में दिमाग बार-बार स्विच कर रहा होता है।

इससे मानसिक थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ता है।

“जॉम्बी स्क्रॉलिंग” 

आजकल लोग तनाव कम करने के नाम पर लगातार और बिना सोचे-समझे सोशल मीडिया स्क्रॉल करते रहते हैं। इसे ही “Zombie Scrolling” कहा जाता है, मतलब जब कोई व्यक्ति बिना सोच-समझे लगातार सोशल मीडिया या मोबाइल पर स्क्रॉल करता रहता है, उसे “Zombie Scrolling” कहा जाता है।

यह देखने में मनोरंजक लगता है, लेकिन असल में:

एक अध्ययन के अनुसार, एक व्यक्ति एक बार मोबाइल उठाने पर औसतन करीब 300 फीट तक स्क्रॉल कर जाता है—यह दिमाग के लिए अत्यधिक बोझ है।

★फोन की लत के दुष्परिणाम (बड़ों में) -

 1. नींद में परेशानी -

मोबाइल की नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को कम करती है।

परिणाम:

देर से नींद आना,

नींद का बार-बार टूटना,

सुबह थकान महसूस होना।

 2. आंख, गर्दन और शरीर पर असर -

आंखों में जलन और सूखापन,

गर्दन व कंधों में दर्द,

पीठ की मांसपेशियों पर दबाव,

 3. मानसिक प्रभाव-

ध्यान केंद्रित न कर पाना,

आत्मविश्वास में कमी,

तुलना की भावना,

अकेलापन और अवसाद,

★बच्चों पर मोबाइल का खतरनाक असर -

केजीएमयू (लखनऊ) का अध्ययन- 

5 वर्ष से कम उम्र के 134 बच्चों पर अध्ययन- 

बच्चे रोज़ 3–4 घंटे मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं,

यह सामान्य से 2–3 गुना अधिक है,

बच्चों में देखे गए प्रभाव-

ऑटिज़्म पीड़ित बच्चों पर और अधिक गंभीर असर- 

अध्ययन में:

67 ऑटिज़्म पीड़ित

67 सामान्य बच्चे

पाया गया कि ऑटिज़्म पीड़ित बच्चे रोज़ लगभग 4 घंटे मोबाइल इस्तेमाल कर रहे थे।

अधिक मोबाइल उपयोग से बीमारी की गंभीरता बढ़ रही थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, पाँच वर्ष से कम उम्र में:

 फोन की लत के और दुष्परिणाम (बच्चों में)-

 ★अभिभावकों के लिए ज़रूरी कदम -

मोबाइल से दूरी, जीवन से नज़दीकी,

मोबाइल पूरी तरह छोड़ना समाधान नहीं है,

लेकिन संतुलित और सजग उपयोग ज़रूरी है।

★बड़े अपनाएँ ये आदतें:

आईए, इन आदतों को और गहराई से समझते हैं - 

  1.  माइंडफुलनेस का अभ्यास - 

दिन में 5–10 मिनट आँखें बंद कर सांस पर ध्यान दें।

यह दिमाग को शांत करता है और फोन की आदत को कमजोर करता है।

  2. मनोवैज्ञानिक विकल्प चुनें - 

ये गतिविधियाँ दिमाग को रचनात्मक बनाती हैं।

  3. किताबें पढ़ें -

यदि आपको फोन पर पढ़ना पसंद है तो ई-बुक पढ़ें, लेकिन सोशल मीडिया से दूर रहें। प्रयास करें असली किताबों को पढ़ने का।

लक्ष्य रखें—दिन में 20–30 पन्ने।

 4. सिर्फ 10 मिनट का ब्रेक लें -

अगर आप लगातार फोन देख रहे हैं, तो बीच-बीच में 10 मिनट पूरा ब्रेक लें।

इससे आदत कमज़ोर पड़ती है।

 5. फ़ोन को दूरी पर रखें - 

काम या पढ़ाई करते समय मोबाइल को कमरे से बाहर रखें।

इससे ध्यान की शक्ति 30% तक बढ़ती है।

 6. टेक-फ्री ज़ोन्स बनाएं -

यहाँ फोन बिल्कुल न लाएँ।

★निष्कर्ष - 

 


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