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AI इंसानों से ज़्यादा ‘पानी पी’ रहा है? सच्चाई क्या है?

AI इंसानों से ज़्यादा ‘पानी पी’ रहा है? सच्चाई क्या है?

📅 24 Dec 2025 | 🏫 Computer Applications | 👁️ 299 Views

Dharmendra Bhaskar
Computer Applications

❓ क्या आप जानते हैं?

AI खुद पानी नहीं पीता,
लेकिन AI को चलाने वाले डेटा सेंटर्स
सर्वरों को ठंडा रखने के लिए लाखों लीटर पानी इस्तेमाल करते हैं।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) आज हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, काम, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सोशल मीडिया से लेकर चैटबॉट तक—हर जगह AI मौजूद है। लेकिन हाल के दिनों में एक सवाल तेजी से उठ रहा है: क्या AI इंसानों से भी ज़्यादा पानी इस्तेमाल कर रहा है?

🔍 ऐसा क्यों?

इस सवाल का सीधा जवाब है—AI खुद पानी नहीं पीता, लेकिन AI को चलाने वाली डेटा सेंटर्स की विशाल मशीनरी बहुत अधिक पानी खर्च करती है। दरअसल, AI मॉडल्स को चलाने के लिए हज़ारों सर्वर 24 घंटे काम करते हैं। ये सर्वर अत्यधिक गर्म हो जाते हैं, और उन्हें ठंडा रखने के लिए वॉटर-बेस्ड कूलिंग सिस्टम, कूलिंग टॉवर और इवैपोरेटिव कूलिंग का इस्तेमाल किया जाता है।

📊 एक तुलना

विशेषज्ञों के अनुसार, एक बड़ा डेटा सेंटर प्रतिदिन लाखों लीटर पानी का उपयोग कर सकता है। कुछ आकलनों में यह भी कहा गया है कि AI से जुड़ी एक छोटी-सी डिजिटल गतिविधि (जैसे कई सवाल पूछना) के पीछे भी अप्रत्यक्ष रूप से पानी की खपत होती है। इसकी तुलना में एक सामान्य इंसान दिनभर में औसतन 3–4 लीटर पानी पीता है।

⚠️ समस्या क्यों गंभीर है?

यह समस्या इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि कई डेटा सेंटर्स ऐसे इलाकों में स्थित हैं जहाँ पहले से ही जल संकट है। इससे स्थानीय आबादी, खेती और पीने के पानी पर दबाव बढ़ता है। इसलिए “AI इंसानों से ज़्यादा पानी पी रहा है” कहना पूरी तरह गलत नहीं, लेकिन यह अधूरी सच्चाई है—असल मुद्दा है AI इंफ्रास्ट्रक्चर की जल-खपत

🌱 समाधान क्या है?

सकारात्मक पक्ष यह है कि इसका समाधान संभव है। विशेषज्ञ ग्रीन AI, रीसाइकल्ड पानी, एयर-कूलिंग तकनीक, और नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाले डेटा सेंटर्स की ओर बढ़ने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही, कम ऊर्जा और कम संसाधन लेने वाले एफ़िशिएंट AI मॉडल्स पर भी काम हो रहा है।

 


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