राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षक शिक्षा संबंधित प्रावधान एवं चुनौतियां
डॉ. लाल बहादुर पाल
असिस्टेंट प्रोफेसर (बी .एड .विभाग), महादेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बरियासनपुर, वाराणसी
अगली पीढ़ी को संवारने वाले शिक्षकों की एक टीम के निर्माण में अध्यापक शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है ।अच्छे शिक्षक तैयार करने के लिए प्रशिक्षकों को बहुविषयक दृष्टिकोण और ज्ञान का भंडार रखना होता है ।अध्यापक शिक्षा से संबंधित नीति निर्माण कर्ताओं को अध्यापक शिक्षा और शिक्षण प्रक्रियाओं से संबंधित होने वाली प्रगति के साथ ही साथ भारतीय मूल्यों , भाषाओं,ज्ञान ,लोकाचार और परंपराओं जनजातीय परंपराओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए ।उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा आयोग (2012) की रिपोर्ट के अनुसार देश भर में स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे शिक्षक शिक्षा संस्थानों की संख्या लगभग 10000 से अधिक है जो अध्यापक शिक्षा की गुणवत्ता के लिए तनिक भी गंभीर नहीं है बल्कि यह संस्थाएं NCTE के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मोटी रकम कमाने में लगे हुए हैं तथा ऊंचे दामों पर डिग्रियां बेची जा रही हैं।इस दिशा में अब तक किए गए विनियामक प्रयास न तो सिस्टम में बड़े पैमाने पर व्याप्त भ्रष्टाचार को रोक पाए हैं और ना ही गुणवत्ता के लिए निर्धारित बुनियादी मानकों को ही लागू कर पाए हैं बल्कि इन प्रयासों का इस क्षेत्र में उत्कृष्टता और नवाचार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है ।अतः इस क्षेत्र और इसकी नियामक प्रणालियों में महत्वपूर्ण कार्यवाहियों के द्वारा पुनरुद्धार की तात्कालिक आवश्यकता है जिससे की गुणवत्ता के उच्चतर मानकों को निर्धारित किया जा सके और शिक्षक शिक्षा की प्रणाली में अखंडता, विश्वसनीयता, प्रभाविता और उच्चतर गुणवत्ता को बहाल किया जा सके।
शिक्षण पेशे की प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए आवश्यक नैतिकता और विश्वसनीयता के स्तरों में सुधार करने के लिए और एक सफल विद्यालयी प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए नियामक प्रणाली को उन निम्न स्तरीय और बेकार अध्यापक शिक्षा संस्थानों के खिलाफ उल्लंघन के लिए 1 वर्ष का समय दिए जाने के बाद उनके ऊपर कठोर कार्यवाही करने का अधिकार होगा जो बुनियादी शैक्षिक मानदंडों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
वर्ष 2030 तक केवल शैक्षिक रूप से सुदृढ़ बहु विषयक और एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (ITEP) ही संचालित होंगे। सभी अध्यापक शिक्षा कार्यक्रमों को बहु विषयक संस्थाओं में ही आयोजित किया जाना चाहिए इसके लिए सभी बड़े बहु विषयक विश्वविद्यालयों,सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और बड़े बहु विषयक महाविद्यालयों का लक्ष्य होगा कि वे अपने यहां ऐसे उत्कृष्ट शिक्षा विभागों की स्थापना और विकास करें जो कि शिक्षण में अत्याधुनिक अनुसंधानों को अंजाम देने के साथ ही साथ अन्य विषयों जैसे दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, भारतीय भाषाओं, तंत्रिका विज्ञान, कला, संगीत ,साहित्य और इतिहास के साथ-साथ विज्ञान और गणित जैसे अन्य विषयों से संबंधित विभागों के सहयोग से भावी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए बी.एड. कार्यक्रम भी संचालित करेंगे। इसके साथ ही साथ वर्ष 2030 तक सभी एकल शिक्षक शिक्षा के संस्थानों को बहुत विषयक संस्थाओं के रूप में बदलने की आवश्यकता होगी क्योंकि उन्हें भी 4 वर्षीय एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों ITEP को संचालित करना होगा।
वर्ष 2030 तक यह 4 वर्षीय एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (ITEP)स्कूली शिक्षकों के लिए न्यूनतम डिग्री योग्यता बन जाएगा। 4 वर्षीय एकीकृत बी.एड.प्रदान करने वाला प्रत्येक उच्चतर शिक्षण संस्थान किसी एक विषय विशेष में पहले से ही स्नातक की डिग्री हासिल कर चुके ऐसे उत्कृष्ट विद्यार्थी जो आगे चलकर शिक्षण करना चाहते हैं के लिए अपने परिसर में 2 वर्षीय बी.एड. कार्यक्रम भी संचालित कर सकते हैं वे विद्यार्थी जिन्होंने किसी विशेष विषय में 4 वर्ष की स्नातक की डिग्री हासिल किए हुए हैं उनके लिए एक वर्षीय बी .एड .कार्यक्रम भी ऑफर किया जा सकता है। इन 4 वर्षीय 2 वर्षी और 1 वर्षीय बी एड कार्यक्रमों के लिए उत्कृष्ट उम्मीदवारों को आकर्षित करने के उद्देश्य से मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्तियों की स्थापना की जाएगी।
अध्यापक शिक्षा प्रदान करने वाले वे सभी उच्चतर शिक्षण संस्थान शिक्षा शास्त्र विषय के साथ ही साथ अन्य बहु विषयों में विषय विशेषज्ञों की उपलब्धता को सुनिश्चित करेंगे ।प्रत्येक उच्चतर शिक्षा संस्थानों को अपने आसपास के सरकारी और निजी स्कूलों से संपर्क स्थापित करके एक ऐसे परिसर का नेटवर्क स्थापित करना होगा जहां भावी शिक्षक अन्य सहायक गतिविधियों जैसे सामुदायिक सेवा, वयस्क और व्यावसायिक शिक्षा आदि में सहभागिता के साथ शिक्षण का कार्य करेंगे ।
शिक्षक शिक्षा के लिए एक समान मानकों को बनाए रखने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रवेश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा आयोजित उपयुक्त विषय और योग्यता परीक्षणों के माध्यम से होगा ,शिक्षा विभाग में संकाय सदस्यों की प्रोफाइल में विविधता होना एक आवश्यक लक्ष्य होगा, शिक्षण और शोध के अनुभवों को महत्व प्रदान की जाएगी शिक्षा शास्त्री परिप्रेक्ष्य विषयों के साथ-साथ विज्ञान शिक्षा, गणित शिक्षा,सामाजिक विज्ञान शिक्षा और भाषा शिक्षा जैसे कार्यक्रमों से संबंधित विषयों में प्रशिक्षण प्राप्त संकाय सदस्यों को शिक्षक शिक्षा संस्थानों में नियुक्त किया जाएगा जिससे बहु विषयक शिक्षा को मजबूती प्रदान की जा सके।
सभी नवनियुक्त पीएच-डी.शोधकर्ताओं से यह अपेक्षा होगी कि वह अपने डॉक्टरेट प्रशिक्षण अवधि के दौरान उनके चुने गए पीएच डी प्रकरण क्रेडिट आधारित पाठ्यक्रम से ले । डाक्ट्रेट प्रशिक्षण के दौरान उन्हें शैक्षिक प्रक्रियाओं, पाठ्यक्रम निर्माण ,विश्वसनीय मूल्यांकन प्रणाली और संचार जैसे क्षेत्रों का अनुभव प्रदान किया जाएगा ।पीएच डी स्कॉलरों के लिए शिक्षण सहायक और अन्य साधनों के माध्यम से अर्जित किए गए वास्तविक शिक्षण अनुभव के न्यूनतम घंटे भी तय होंगे ।सभी विश्वविद्यालयों में संचालित पीएचडी कार्यक्रमों का इस उद्देश्य के लिए पुनः उन्मुखीकरण किया जाएगा।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देने के लिए स्वयं/दीक्षा जैसे प्लेटफॉर्मों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ।शिक्षक शिक्षा के संदर्भ में सलाह देने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन को स्थापित किया जाएगा जिसमें बड़ी संख्या में वरिष्ठ व सेवानिवृत सदस्यों को जोड़ा जाएगा।
चुनौतियां
इन सभी प्रावधानों को धरातल पर उतरने में बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वर्तमान समय में शिक्षक शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों में नियामक संस्थाओं के मानकों व निर्णयों का अवहेलना किया जा रहा है , विशेष कर निजी संस्थाएं शिक्षा के नाम पर धन उगाही का काम कर रही हैं । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जहां बहु विषयक संकाय सदस्यों की बात कही गई है, वहीं निजी संस्थाएं संकाय सदस्यों की नियुक्ति केवल कागजों पर करके संस्थाएं चल रहे हैं, पठन-पाठन के लिए ना तो शिक्षक की उपलब्धता है और ना ही बुनियादी संसाधन की व्यवस्थाएं हैं।
शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्राध्यापकों की उपस्थिति भी वर्तमान समय की एक गंभीर समस्या बनी हुई है।अधिकांश प्रशिक्षण केंद्र डिग्रियां बेच रहे हैं ,ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि प्रशिक्षु ना तो सैद्धांतिक कक्षाओं में उपस्थित हो रहे हैं और ना ही कौशल प्रशिक्षण में । वर्तमान पाठ्यचर्या में विद्यालय में इंटर्नशिप की अवधि 6 महीने निर्धारित की गई है परंतु व्यावहारिक रूप से इंटर्नशिप का कार्यक्रम 6 दिन भी नहीं चल रहा है, जिससे प्रशिक्षुओं में शिक्षण कौशल की तनिक भी जानकारी नहीं हो पा रही है। इसलिए शिक्षा की गुणवत्ता में भारी गिरावट आ रही है ,जो वर्तमान समय की गंभीर चुनौती है।
संदर्भ ग्रंथ सूची
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विकिपीडिया
2. मसौदा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019
3. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ क्रिएटिव रिसर्च थॉट 2020 रिसर्च
4. कचरा, विनीता _ 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020:चुनौतियां एवं संभावनाएं ’ (सेमिनार )लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ
5. शर्मा, आर ए _"अध्यापक शिक्षा एवं प्रशिक्षक तकनीक" आर लाल पब्लिशर्स (2018)
6. भट्टाचार्य, जी सी "अध्यापक शिक्षासी" श्री विनोद पुस्तक मंदिर (2020)
7. www.google scholar