हम सभी ने निश्चय ही कभी ना कभी प्रश्नोत्तरों की क्रीडा खेली होगी, जिसमें हम अपने समक्ष उपस्थित व्यक्ति से एक प्रश्न पूछते हैं और वह उस प्रश्न का उत्तर देता है। अर्थात् एक प्रश्न, एक उत्तर, क्या आपने कभी ऐसा सोचा है, प्रश्न तो कई हों परन्तु प्रत्येक प्रश्नों का उत्तर एक साथ देना है। प्रसिद्ध रीतिबद्ध कवि, आचार्य केशवदास अपनी रचना कविप्रिया में ऐसे ही दस प्रश्नों के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं जिनका उत्तर एक साथ मिलता है, तो प्रस्तुत है कवि केशवदास की रचना, कविप्रिया का सोलहवाँ प्रभाव, तिरपनवाँ पद्य, छप्पनवाँ छन्द;
कहा न सज्जन बुवत कहा सुनि गोपी मोहित।
कहा दास को नाम कवित में कहियत कोहित।।
को प्यारो जगमाँहिं कहा क्षत लागे आवत।
को वासर को करत कहा संसारहि भावत।।
कहु काहि देखी कायर कँपत आदि अन्त को है शरन।
तहँ उत्तर केशवदास दिय 'सबै जगत शोभाधरन' ।।५३।।
यहाँ कुल छह पंक्तियाँ हैं, प्रारम्भ की पाँच पंक्तियों में दस प्रश्न हैं (प्रत्येक पंक्ति में दो प्रश्न) और अन्तिम पंक्ति का एक भाग, 'सबै जगत शोभाधरन' इन दसों प्रश्नों का एक साथ उत्तर देता है।
तो सर्वप्रथम इन दसों प्रश्नों को देख लेते हैं, तत्पश्चात इनके उत्तरों को समझेंगे…
● प्रश्न-१ :- सज्जन क्या नहीं बोते?
● प्रश्न-२ :- गोपी क्या सुनकर मोहित होती है?
● प्रश्न-३ :- दास का नाम क्या है?
● प्रश्न-४ :- कविता में क्या हितकारी है?
● प्रश्न-५ :- जग में प्यारा क्या है?
● प्रश्न-६ :- घाव लगने पर क्या आता है?
● प्रश्न-७ :- दिन को कौन करता है?
● प्रश्न-८ :- संसार को क्या भाता है?
● प्रश्न-९ :- कायर क्या देख कर काँपता है?
● प्रश्न-१० :- आदि और अन्त में कौन शरण है?
अब समझते हैं, कि इन दसों प्रश्नों के उत्तर क्या होंगे? इसके लिए जो कविता की अंतिम पंक्ति का अंश, ‘सबै जगत शोभाधरन’ हैे, उस पर ध्यान केंद्रित करिए। स्पष्टतः इस अंश में मात्राओं सहित क्रमश: कुल १० अक्षर हैं, स, बै, ज, ग, त, शो, भा, ध, र और न। तो अब नियम यह है, कि आपको जिस प्रश्न का उत्तर प्राप्त करना है, उस क्रमांक के अक्षर को अंतिम अक्षर न से मिला दीजिए, आपको जो शब्द मिलेगा वही आपके उस प्रश्न का उत्तर होगा, इससे आपको आपके प्रथम नौ प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे, दसवें प्रश्न का उत्तर, पूरा यह अंश ही होगा, आइए इसे समझते हैं…
● उत्तर-१ :- पहले प्रश्न में पूछा जा रहा है, कि सज्जन क्या नहीं बोते, तो इसका उत्तर हुआ, सन।
● उत्तर-२ :- दूसरे प्रश्न में पूछा जा रहा है, कि गोपी क्या सुनकर मोहित होती है, तो इसका उत्तर हुआ बैन, अर्थात् श्रीकृष्ण के बोल अथवा वचन।
● उत्तर-३ :- तीसरे प्रश्न में पूछा जा रहा है, कि दास का नाम क्या है, तो उत्तर हुआ जन, अर्थात् भक्त अथवा दास।
● उत्तर-४ :- चौथे प्रश्न में पूछा जा रहा है, कि कविता में क्या हितकारी है, तो इसका उत्तर है गन अर्थात् गण।
● उत्तर-५ :- पाँचवा प्रश्न पूछ रहा है, कि जग में प्यार क्या है तो इसका उत्तर हुआ तन, अर्थात् शरीर।
● उत्तर-६ :- छठें प्रश्न में पूछा जा रहा है, कि घाव लगने पर क्या आता है, तो इसका उत्तर हुआ शोन अर्थात् शोण अर्थात् रक्त।
● उत्तर-७ :- सातवें प्रश्न में पूछा जा रहा है, कि दिन को कौन करता है, तो इसका उत्तर हुआ भान अर्थात् भानु अर्थात् सूर्य।
● उत्तर-८ :- आठवें प्रश्न में पूछा जा रहा है, कि संसार को क्या भाता है, तो इसका उत्तर हुआ धन।
● उत्तर-९ :- नवें प्रश्न में पूछा जा रहा है, कि कायर क्या देख कर काँपता है, तो इसका उत्तर हुआ रन अर्थात् रण अर्थात् युद्ध।
● उत्तर-१० :- अब शेष रह गया अंतिम प्रश्न, दसवाँ प्रश्न जिसमें पूछा जा रहा है, कि आदि और अन्त में कौन शरण है, तो इसका उत्तर हुआ पूरा वाक्यांश, सबै जगत शोभाधरन, अर्थात् समस्त जगत की शोभा को धारण करने वाले अर्थात् भगवान श्री कृष्ण, तो इस प्रकार हम देख सकते हैं, की कवि केशवदास ने अपनी रचना, कविप्रिया में दस प्रश्नों के एक साथ उत्तर देने में अचूक सफलता पाई है।
जय श्रीकृष्ण 🙏🙏🙏🙏