---: सौर-परिवार, एक काव्य-चित्रण :---
हो जाओ तुम सब तैयार,
एक सैर तुम्हें करवाएंगे…
है कैसा ये सौर-परिवार,
ये तुम सबको बतलाएंगे…
भाग एक आकाश का,
जो खुद भी घूमता जाता है…
है झुंड जो नौ पिण्डों का,
वो सौर-परिवार कहलाता है…
है जो इन नौ पिण्डों में बृहद,
वो पिण्ड सूर्य कहलाता है…
शेष आठ पिण्ड कहलातें ग्रह,
इन्हें ऐसे जाना जाता है…
सूर्य कोष है अनंत ऊर्जा का,
मानो जैसे अग्नि का गोला है…
लाँघे ये शिखर तापक्रम का,
इतना भी नहीं ये भोला है…
है निकट जो ग्रह इस सूर्य के,
वो ग्रह बुध कहलाता है,
5.8 करोड़ दूर सूर्य से,
वर्ष 88 दिनों में आता है…
अब है आगे अति गर्म ग्रह,
ये ग्रह शुक्र कहलाता है,
10.8 करोड़ किमी दूर सूर्य से,
वर्ष 225 दिनों में आता है…
थोड़ा और भी आगे चलतें इसके,
ये तो पृथ्वी घर हमारा है,
15 करोड़ किमी दूर सूर्य से,
वर्ष 365.25 दिनों में होता पूरा है…
ये पृथ्वी ग्रह है अति विशिष्ट,
ये तो समक जीवन दात्री है…
चंद्र करे इसकी परिक्रमा,
हम जीवों को करती उत्कृष्ट…
आगे है आता लाल ग्रह,
ये ग्रह मंगल कहलाता है…
22.8 करोड़ किमी दूर सूर्य से,
वर्ष 687 दिनों में आता है…
आगे है अब अति विशाल ग्रह,
इसलिए बृहस्पति कहलाता है…
77.8 करोड़ किमी दूर सूर्य से,
वर्ष 11.8 वर्षों में आता है…
अब है हल्का वलय युक्त ग्रह,
ये तो शनि ग्रह कहलाता है…
1.4 अरब किमी दूर सूर्य से,
वर्ष 29 वर्षों में आता है…
अब है नीला अति शीत ग्रह,
ये ग्रह अरुण कहलाता है…
2.9 अरब किमी दूर सूर्य से,
वर्ष 84 वर्षों में आता है…
अब आता है अंतिम ग्रह,
इसे वरुण ग्रह कहा जाता है…
4.5 अरब किमी दूर सूर्य से,
वर्ष 165 वर्षों में आता है…
___रचना, अतुल कुमार मिश्र